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| a few more the shayaris |
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melbin
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उनकी झुकी पलकों में कोई तो सुनेहरा सपना है...........
उनके दबे होंठों में कोई तो महका राज़ है.............. आज उन पलकों में हम ज़रूर सिमट जायेंगे........... उनके होंठों पे सदा के लिए एक गीत बन जायेंगे गुज़र चुके है वोह पल, जब लड़कपन में जीना होता था, शामियाना लगती थी, दिल खुश होता था; थिरकते वोह पल अब यादें बन गयी है, कैसे भूले उन्हें, मदहोश तो आज भी है |
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| a few more the shayaris |
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