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| Hindi Shayari in Hindi Script! |
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sambu
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1. रोज़
दिन के साथ आसान है बसर दिन है अजनबी हमसफ़र और अजनबी के साथ बात करना जरूरी नहीं और काली कलूटी रात भी ज्यादा नहीं सताती है अपने काले कंबल में बेहोशी सौगात ले आती है कमीनी है तो बस ये शाम साथ लाती है यादें बेलगाम जैसे कालेज़ के छिछोरे यार ना टाले बनें, न संभाले 2. मुसलमान अच्छे लगते हैं मुझे मुसलमान या फिर यूँ कहूं कि इन्सान अच्छे लगते हैं उनके बुर्ज़, मीनारें उनकी मस्ज़िद, गुम्बज़, अज़ान अच्छे लगते हैं उनके शायर औ’ उनकी खूबसूरत ज़ुबान मेरी ज़मीन के भागी हैं उनके कुनबे मेरी रोटी में सिले हैं उनके भी निवाले चाहे कुछ कहे तुम्हारी दुनिया देख्नना एक दिन जीतेगा मेरा नज़रिया औ’ हारेंगे अलगाववादी जब उनका एक हाथ दूसरे से कर लेगा रंज़िश चाहे कुछ कहे तुम्हारा बुश अच्छे लगते हैं मुझे मुसलमान या फिर यूँ कहूं कि इन्सान 3. कुत्ता पहले भटकता फिरता था गली-गली आँखें फ़ाड़े, जीभ उघाड़े हाँफता, काँपता, भूखा, बेसबरा अब ये साला तेरा पालतू हो गया है मेरा दिल 4. साला सूरज ठंडक पड़ जाये दिल को जो मुँह करवा ले काला सूरज तड़के मेरी खिड़की पे फिर आ बैठा है साला सूरज बादल से मरहमपटटी कर दो तो शायद चैन पड़े कुछ आसमान की पीठ पे जैसे पीप भरा इक छाला सूरज सुनते हैं गोरी नस्लों को धूप बड़ी अच्छी लगती है हमको बारिश दे दो, बदले में ले जाओ साला सूरज |
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| Hindi Shayari in Hindi Script! |
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