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| One of my Hindi Poems. |
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melbin
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आज फ़िर...
आज फ़िर हमने एक सपना देखा, हो जायेगा पूरा, वो अरमान है सोचा । खुश हो जाये दिल का हर एक कोना, फ़िर आरजू की कलियो को खिलता देखा ॥ लाखो है चाहते जो रोज दम तोडती है, फ़िर भी इच्छाएँ जीने को मचलती है । तेज हवाओ की आँधी मे पंख आजमाती है, तूफ़ानो से दोस्ती कर अपना मकाम ढूँढती है ॥ मिल जायेगी मंजिल,है आँखॊ को यकीन, तो क्या? गर है उल्झनो की गहराईयाँ अभी । दिल टूटा है, निराशा की चोट है बहुत गहरी, है अजीब, दौड़ना सीखाती है,यही जीन्दगी रुकी रुकी ॥ मिली कई राहें हमें हमारी सोच के सफ़र पर, कई ख्त्म हो गई अँधियारी हार के मो़ड़ पर । पर इन्ही राहों ने है,आगे बढ़ना सिखाया, सफ़र पूरा होगा इनके बिना भी,ये यकीन है दिलाया ॥ आज हमने ये विश्वास फ़िर से जताया, इसलिये आज फ़िर हमने एक सपना देखा ॥ |
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| One of my Hindi Poems. |
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